:
Breaking News

थलापति विजय का राजनीतिक सफर: सुपरस्टार से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने तक की पूरी कहानी

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

साउथ सुपरस्टार थलापति विजय ने फिल्मों से राजनीति तक का सफर तय करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचकर इतिहास रच दिया है। जानिए टीवीके पार्टी, रैलियों, विवादों और चुनावी रणनीति की पूरी कहानी।

तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय ने आखिरकार वह कर दिखाया जिसकी चर्चा लंबे समय से तमिलनाडु की राजनीति में हो रही थी। फिल्मों में अपनी जबरदस्त लोकप्रियता के दम पर करोड़ों दिलों पर राज करने वाले विजय अब तमिलनाडु की सत्ता की कमान संभालने जा रहे हैं। तमिलगा वेट्ट्री कझगम (टीवीके) की शानदार चुनावी सफलता के बाद विजय आज राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले हैं। यह केवल एक अभिनेता की राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की उस परंपरा का नया अध्याय है जहां फिल्मी सितारे जनता के बीच जननायक बनकर उभरते हैं।

जब विजय ने राजनीति में आने की घोषणा की थी, तब राजनीतिक विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग इसे केवल स्टारडम का असर मान रहा था। कई लोगों को लगा कि फिल्मों की लोकप्रियता राजनीति में वोटों में तब्दील नहीं हो पाएगी। लेकिन विजय ने बेहद सुनियोजित तरीके से अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की और कुछ ही वर्षों में तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बन गए।

थलापति विजय का राजनीतिक सफर अचानक शुरू नहीं हुआ था। इसके पीछे कई वर्षों की तैयारी और सामाजिक सक्रियता थी। फिल्मों के जरिए उन्होंने युवाओं, मध्यम वर्ग और गरीब तबके के बीच मजबूत पकड़ बनाई। उनकी फिल्मों में भ्रष्टाचार विरोध, सामाजिक न्याय और व्यवस्था परिवर्तन जैसे मुद्दे लगातार दिखाई देते रहे, जिसने उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं बल्कि एक वैचारिक चेहरा भी बना दिया।

फरवरी 2024 में विजय ने आधिकारिक रूप से राजनीति में कदम रखते हुए अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेट्ट्री कझगम’ की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए पार्टी लॉन्च की जानकारी दी। हालांकि उस समय उन्होंने साफ कर दिया था कि पार्टी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेगी और न ही किसी दल को समर्थन देगी। उस वक्त से ही यह साफ हो गया था कि विजय का असली लक्ष्य 2026 का तमिलनाडु विधानसभा चुनाव है।

राजनीति में प्रवेश के साथ ही विजय ने बड़ा फैसला लेते हुए अभिनय करियर से दूरी बनाने का संकेत दिया। यह निर्णय उनके प्रशंसकों के लिए चौंकाने वाला था, लेकिन इससे जनता के बीच यह संदेश गया कि विजय राजनीति को गंभीरता से ले रहे हैं।

राजनीतिक जमीन तैयार करने में विजय के फैन क्लब ‘विजय मक्कल इयक्कम’ ने अहम भूमिका निभाई। वर्षों से सक्रिय यह संगठन सामाजिक कार्यक्रमों, रक्तदान शिविरों, राहत कार्यों और स्थानीय जनसंपर्क के जरिए जनता के बीच मजबूत नेटवर्क बना चुका था। यही नेटवर्क बाद में टीवीके का सबसे बड़ा संगठनात्मक आधार बना।

विजय केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। बाढ़, प्राकृतिक आपदाओं और सामाजिक संकट के समय उन्होंने राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई। दिसंबर 2023 में तमिलनाडु के कई जिलों में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाई। इन गतिविधियों ने उनकी सामाजिक छवि को और मजबूत किया।

राजनीति में उनकी असली ताकत पहली बार अक्टूबर 2024 में दिखाई दी, जब टीवीके की पहली आधिकारिक रैली तमिलनाडु के विक्रवंडी में आयोजित हुई। इस रैली में उमड़ी भारी भीड़ ने तमिल राजनीति के पारंपरिक दलों को चौंका दिया। विजय ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार, परिवारवाद और विभाजनकारी राजनीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने जनता के सामने खुद को बदलाव की राजनीति का चेहरा पेश किया।

इसके बाद विजय लगातार राज्यभर में जनसभाएं और रैलियां करते रहे। उनकी सभाओं में युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं की भारी भागीदारी देखने को मिली। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विजय ने डिजिटल प्रचार, फैन नेटवर्क और जमीनी संगठन को मिलाकर एक नई चुनावी शैली तैयार की।

हालांकि विजय का राजनीतिक सफर विवादों से पूरी तरह अछूता नहीं रहा। सितंबर 2025 में करूर में आयोजित टीवीके रैली के दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे तमिलनाडु को झकझोर दिया। विजय ने मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता का एलान किया और घटना पर गहरा दुख जताया।

रैली हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही और भीड़ नियंत्रण को लेकर सवाल उठे। मामले में शिकायत दर्ज हुई और बाद में जांच केंद्रीय एजेंसी तक पहुंची। विजय से भी पूछताछ की गई। हालांकि इस विवाद के बावजूद जनता के बीच उनकी लोकप्रियता में खास कमी नहीं आई।

राजनीति में आने से पहले विजय अपने पारिवारिक विवादों को लेकर भी सुर्खियों में रहे। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर द्वारा बनाई गई राजनीतिक पार्टी को लेकर मतभेद सामने आए। विजय ने सार्वजनिक रूप से खुद को उस पार्टी से अलग बताया और साफ किया कि उनके नाम का राजनीतिक उपयोग बिना अनुमति नहीं किया जा सकता। इस विवाद ने कुछ समय के लिए राजनीतिक हलकों में हलचल जरूर पैदा की, लेकिन विजय ने अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखी।

इसी दौरान उनकी आखिरी फिल्म मानी जा रही ‘जन नायकन’ भी चर्चा में रही। फिल्म की रिलीज में सेंसर विवाद और ऑनलाइन लीक जैसी घटनाओं ने खूब सुर्खियां बटोरीं। बावजूद इसके विजय के प्रशंसकों का उत्साह कम नहीं हुआ।

2026 विधानसभा चुनाव में विजय ने पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने खुद को पारंपरिक राजनीति के विकल्प के रूप में पेश किया। उनकी सभाओं में रोजगार, भ्रष्टाचार, युवाओं की भागीदारी, शिक्षा और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। जनता के बीच उनकी साफ-सुथरी छवि और स्टार अपील ने चुनावी माहौल पूरी तरह बदल दिया।

चुनाव परिणामों में टीवीके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तमिलनाडु की सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया। गठबंधन सहयोग के बाद विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। इसके साथ ही वे तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से मुख्यमंत्री बनने वाले नए सुपरस्टार बन गए।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय की सफलता केवल स्टारडम की वजह से नहीं आई। उन्होंने लंबे समय तक संगठन निर्माण, सामाजिक संपर्क और मुद्दा आधारित राजनीति पर काम किया। यही वजह रही कि जनता ने उन्हें केवल अभिनेता नहीं बल्कि संभावित नेता के रूप में स्वीकार किया।

अब तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विजय अपने फिल्मी करिश्मे को प्रशासनिक सफलता में बदल पाएंगे। जनता की उम्मीदें बहुत बड़ी हैं और विजय के सामने खुद को एक सफल शासक साबित करने की चुनौती भी उतनी ही कठिन है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *